परिचय

गोविंद सिंह। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक गांव है सौगांव, जहां आज भी सड़क नहीं है, वहीं जन्म। चंडीगढ़ में पढ़ाई। मुंबई, कोलकाता और दिल्ली में काम मिला। 29 साल से पत्रकारिता में। कई बार पत्रकारिता से बाहर भी छलांग लगाई लेकिन मन प्रिंट पत्रकारिता में ही रमता है। जैसे ‘उड़ि जहाज को पंछी, पुनि जहाज पै आवे।’ हिंदुस्तान के पूर्व कार्यकारी संपादक। पुराने जमाने की पत्रकारिता का गुणगान करते हुए आज की पत्रकारिता करने की कोशिश करता हूं।

कभी दुश्यंत कुमार ने कहा था
बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं
और नदी के किनारे घरा बसे हैं
शाम ढल चुकी है। यमुना किनारे बसे लोगों की झोपड़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। लिहाजा वे नोएडा से निजामुद्दीन पुल को जोड़ने वाली सड़क के किनारे आ बसे हैं अपने तिरपाल और खटिया के साथ। सड़क पर चहल पहल बढ़ गई है। बच्चे-बूढ़े सड़क पर आ धमके हैं। और कहां जाएं? [Read more]

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