परिचय
हरजिन्दर
एसोशिएट एडीटर, हिन्दुस्तान
लखनऊ से शुरू हुई जीवन यात्रा किसी पैसेंजर ट्रेन की तरह पटना और चंडीगढ़ होते हुए फिलहाल दिल्ली में अटकी है। बचपन के कल्पनालोक और फतांसियों से बड़े होकर जो दोस्त और दिलचस्पियां हासिल हुई उसके बाद पत्रकार तो खैर बनना ही था। कैरियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स, पटना से हुई, जनसत्ता, चंडीगढ़ और फिर दिल्ली में इंडिया टुडे के कुछ दिन टेलीविजन में भी हाथ आजमाए। इसके बाद संडे आब्जर्वर में अंग्रेजी पत्रकारिता शुरू कर दी, फिर www.amarujala.com की शुरुआती टीम का नेतृत्व किया और फिलहाल हिंदुस्तान में एसोशिएट एडीटर।
काम जरा मुशकिल है, लेकिन इसी जाड़े की किसी ठंडी सुबह थोड़ी सी हिम्मत दिखाएं। शाल, मफलर, टोपी वगैरह जो कुछ भी है सब कुछ लपेटिये और सुबह छह बजे घर से बाहर आ जाएं। अगर इतवार नहीं है तो आपको वहां चार बरस या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे स्कूल की बस का इंतजार करते मिल जाएंगे। अब आप चाहें तो इन बच्चों की हिम्मत को दाद दे सकते हैं, या फिर स्कूलों के बेदर्द रवैये को लानत। [Read more]
कहा तो यही जाता है कि इंसान अगर संकल्प साध ले तो कुछ भी कर सकता है। पर दिक्कत यह है कि संकल्प साधना इतना आसान नहीं होता। खासकर जब मामला सिगरेट जैसी किसी लत को छोड़ने का हो। [Read more]
कहते हैं कि लोग अक्सर खबरों को याद नहीं रखते, लेकिन खबरों को याद रखने के अपने कष्ट हैं। खासकर खबरें जब पर्यावरण की हों और आप उसके लिए संवेदनशील हों। [Read more]
Posted by admin on Saturday, November 14, 2009 at 7:57 am
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