काम जरा मुशकिल है, लेकिन इसी जाड़े की किसी ठंडी सुबह थोड़ी सी हिम्मत दिखाएं। शाल, मफलर, टोपी वगैरह जो कुछ भी है सब कुछ लपेटिये और सुबह छह बजे घर से बाहर आ जाएं। अगर इतवार नहीं है तो आपको वहां चार बरस या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे स्कूल की बस का इंतजार करते मिल जाएंगे। अब आप चाहें तो इन बच्चों की हिम्मत को दाद दे सकते हैं, या फिर स्कूलों के बेदर्द रवैये को लानत। Read more