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	<title>बेआवाज़</title>
	<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz</link>
	<description>Just another  weblog</description>
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		<title>बिहार में विकास पर अयोध्या</title>
		<description>अभी दो-तीन दिन पटना में था। पिछली बार तब गया था जब विधानसभा चुनाव में लालू परिवार की सत्ता विदा हो रही थी। तब कवरेज के लिए दिल्ली से पटना की यात्रा हवाई जहाज से की थी तो रास्ते में अंदाजा नहीं मिला था। इस दफा नितांत व्यक्तिगत काम से ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2010/09/16/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af/</link>
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		<title>तरक्की का रास्ता इधर से ही, नेता भले निराश हों</title>
		<description>अभी हाल में फैजाबाद गया था। ऑफिस के काम से। लखनऊ से फैजाबाद जाने के बीच रुदौली में है। यह फिलहाल फैजाबाद जिले का तहसील है। फिलहाल से मत चौंकिए। सरकार बदलती है, तो इसका जिला मुख्यालय भी बदल जाता है। मुलायम की सरकार हो तो यह बाराबंकी जिले में ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2010/06/01/%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a7%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80/</link>
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		<title>मैं कनफ्यूज्ड हूं, आपकी मदद की दरकार है</title>
		<description>यह ब्लॉग दलित और मुस्लिम जीवन-मानसिकता आदि को लेकर है लेकिन इस बार इससे थोड़ा हटने की इजाजत चाहता हूं। दरअसल, मैं कनफ्यूज हो गया हूं और आपकी मदद चाहता हूं। मसला ही ऐसा है। गुस्सा भी है, संतोष भी लेकिन सबसे ज्यादा है तो भ्रम। मेरा छोटा बेटा पुणे ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2010/02/05/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a6/</link>
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		<title>लोकप्रियता की गली अति सांकरी, टेढ़ी-मेढ़ी</title>
		<description>दिल्ली में मेरे एक दोस्त हैं डॉ. मंजूर आलम। जानने वाले अधिकतर लोग उन्हें डॉ. साहब कहते हैं। लेकिन वे मुझे अपना दोस्त नहीं मानते। उनका कहना है कि ‘आप दोस्त कैसे हो सकते हैं? आप तो हमारे भाई हैं।’ मंजूर साहब इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज के चेयरमैन हैं। इस ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2010/01/19/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82/</link>
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		<title>बहुत कुछ कह रही हैं ये मूर्तियां</title>
		<description>मेरे एक मित्र हैं। ब्राह्मण हैं। (माफ करें, जाति इसलिए बतानी पड़ रही है क्योंकि आगे इसका संदर्भ है और इसके बिना बात बनती नहीं।) पत्रकार हैं। आम तौर पर जैसा कि चालीस पार के पत्रकारों के साथ होता है, वे आज की पत्रकारिता के तौर-तरीकों से परेशान हैं। जब ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2009/12/30/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%95%e0%a4%b9-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d/</link>
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		<title>रास्ता तो मुलायम-लालू ने ही खोल दिया</title>
		<description>पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी गजब की चीज है। खासकर दिन के वक्त। सुबह-शाम तो भागदौड़ में पता नहीं चलता लेकिन दिन के वक्त इसमें यात्रा कीजिए तो कई बार पब्लिक सेंटिमेंट का ठीक से पता चलता है। ठीक से न चले तो अंदाजा हो ही जाता है। देश-दुनिया की बातें। आम ...</description>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/beaawaz/2009/11/19/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9/</link>
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