सरे राह
कुछ जानकारी, ज्यादातर अज्ञान, कुछ गपबाज़ी, कुछ गलत मत-मतांतर, कुछ प्रासंगिक, कुछ अवांतर, तरह-तरह की बातें, फिल्में, राजनीति, खेल, अभिजात और सड़क की संस्कृति। इन सबके बारे में इन बातों के कोई सूत्र और इनका कोई अर्थ हो सकता है कि हो, और न भी तो क्या फर्क पड़ता है?
राजेन्द्र धोड़पकर
कार्टूनिस्ट व एसोशिएट एडीटर, हिन्दुस्तान


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