राजनीति एक मनोरंजन है और मनोरंजन भी एक राजनीति है। इसे थोड़ा और फैला कर इस तरह कहा जा सकता है कि राजनीति दीर्घकालिक मनोरंजन है और मनोरंजन अल्पकालिक राजनीति है। लेकिन जो लोग राजनीति को जरूरत से ज्यादा गंभीर और सत्ता व धन कमाने के साथ जान लेने और जान देने का कर्म बना देना चाहते हैं उन्हें यह दोनों बातें खराब लगेंगी। वे चाहते होंगे कि राजनीति या तो हमेशा महात्मा गांधी का आमरण अनशन बनी रहे या लूटपाट और खून- खराबे का उपक्रम। Read more
राम मनोहर लोहिया इतिहास भी हैं और मिथक भी। वे राजनीतिज्ञ भी हैं और धर्मगुरु भी। वे दार्शनिक भी हैं और राजनीतिक कार्यकर्ता भी। सचमुच आज के समाजवादी नेताओं को देखकर यकीन नहीं होता कि उनके आंदोलन में कभी इतनी विलक्षण प्रतिभा रही होगी। जिस तरह वे राम, कृष्ण और शिव को भारतीय पूर्णता का स्वप्न मानते हैं उसी तरह उनको भी भारतीय समाजवाद का स्वप्न माना जा सकता है। Read more
डॉ लोहिया व्यक्ति स्वातंत्रय, समता और प्रेम के अनन्य उपासक थे। पर उनका यह भी मानना था कि स्वतंत्रता और समता के बिना प्रेम संभव नहीं है। इसलिए वे प्रेम की अनिवार्य शर्त के रूप में पहली दोनों स्थितियों को पैदा करना चाहते थे। अपने आदर्शों के समाज की स्थापना के लिए वे मौजूदा समाज की कमियों को चिह्नित करते थे और उन पर न सिर्फ अपने समय के अर्थशास्त्रीय और समाजशास्त्रीय तर्कों से हमला करते थे, बल्कि इस काम में इतिहास और मिथक दोनों का सहारा लेते थे। Read more

