परिचय

शशि शेखर
प्रधान संपादक, हिन्दुस्तान

जन्मः वाराणसी, पत्रकारिता अनुभवः 29 साल। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग से स्नातकोत्तर। प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन तीनों विधाओं में माहिर। हिन्दी दैनिक ‘आज’, ‘अमर उजाला’ और ‘आज तक’ टीवी चैनल में काम कर चुके हैं। वर्ष 1983 से ‘आजकल’ नामक स्तंभ लिख रहे हैं। फिलहाल हिन्दुस्तान अखबार समेत एचटी समूह के सभी हिन्दी प्रकाशनों व उनके ऑनलाइन संस्करणों के प्रधान संपादक।

मेरे अपने अखबार में खबर छपी- उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला की जमानत नामंजूर। इस समाचार ने मेरी स्मृतियों के अंधेरे बंद पड़े कमरों की खिड़कियां-दरवाजे अचानक थपथपा दिए। कुछ पुरानी यादें ताजा हो गईं। [Read more]

आइए खुद को 55-56 साल पीछे ले चलें। उन दिनों भी नई दिल्ली और बीजिंग सीमा विवाद में उलझे हुए थे। भारत को आजाद हुए 11 वर्ष हो चुके थे और चीन की साम्यवादी क्रांति कुल नौ बरस पुरानी थी। हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एक समाजवादी हिन्दुस्तान का सपना देख रहे थे, जिसमें चीन से युद्ध की कोई जगह नहीं थी। [Read more]

दिल्ली में एक अबोध बच्ची से बलात्कार के बाद बयानों के बाजीगर अपनी खोहों से फिर बाहर निकल आए हैं। घिसे-पिटे तर्को पर उन्होंने शब्दों की नई सान चढ़ा दी है, ताकि देश में उन्माद लहर पैदा हो सके। [Read more]

जनरल परवेज मुशर्रफ इस वक्त उस शहर में कैद हैं, जहां की सबसे ताकतवर कुरसी पर बैठकर वह कभी खुद को पाकिस्तान का सीईओ बताया करते थे। यह वक्त का खेल है या जनरल साहब खुद समय की नब्ज भांपने की कला से नावाकिफ हैं? [Read more]

‘कश्मीर बदल गया है, पर क्या बाकी भारत बदला है? हम यह कहते हैं कि हम उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहते हैं, लेकिन मुख्यधारा खुद उनका स्वागत नहीं करती और उनकी विरोधी बनी हुई है। इसके लिए जिस संवेदनशीलता की जरूरत है, वह हम नहीं दिखाते।’ [Read more]