सैकड़ों ई-मेल और खत अब तक आ चुके हैं। ‘हिन्दुस्तान’ के ‘आओ राजनीति करें’ अभियान से प्रेरित होकर बहुतों ने फैसला किया है कि वे इस बार वोट जरूर डालेंगे। अब उनके सामने सवाल है कि अपना मत किसको दें? उन्हें जवाब की दरकार है और इसके लिए वे लगातार चिट्ठियां लिख रहे हैं। [Read more]
परिचय
कुछ दिन पहले। स्थान- कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन। लखनऊ से दिल्ली आ रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से थोड़ा पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है। मन खिल उठता है- चलो कुछ और न सही, पर शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का वजूद अभी कायम है। पर इस उल्लास की जिंदगी सिर्फ ढ़ाई या तीन मिनट की थी। अगले कुछ क्षणों में जो होने जा रहा था, वह तकलीफदेह था। [Read more]
ये पंक्तियां लिखते वक्त गुजरे कई दिनों की तरह एक बार फिर मेरी आंखें नम हो आई हैं। क्यों? पिछले मंगलवार को जब सर्दी अपने ही बनाए रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा थी, अचानक मन में दिल्ली की सड़कों पर बसर कर रहे आम आदमी का हाल जानने की इच्छा जाग पड़ी। मेट्रो में बैठा और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्टेशन पर उतर गया। सामने मशहूर सफदरजंग अस्पताल का प्रवेश द्वार था। वहीं दिल को अंदर तक दुखा देने वाला वह दृश्य दिखाई पड़ा। [Read more]
सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नई दिल्ली में मुकदमा चलाने की खबर के बाद अभिव्यक्ति की आजादी के स्वयंभू पहरुए अपना परचम लहराते हुए ‘वर्चुअल वर्ल्ड’ की दिग्विजय पर निकल पड़े हैं। [Read more]
देश की आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अगले कुछ हफ्तों में जम्हूरियत के सबसे बड़े जश्न यानी चुनावों में शामिल होने जा रहा है। पर क्या आपको कहीं भी उत्सव का माहौल लगता है? हर तरफ सिर्फ और सिर्फ कीचड़ उछाला जा रहा है। [Read more]


