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	<title>Comments for प्याली में तूफान</title>
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	<description>Just another  weblog</description>
	<pubDate>Thu, 17 May 2012 13:30:13 +0000</pubDate>
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		<title>Comment on हमारा राष्ट्रपति कैसा हो? by अमित माथुर</title>
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		<dc:creator>अमित माथुर</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 May 2012 11:21:05 +0000</pubDate>
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		<description>मान्यवर, मेरे विचार से इस समय राष्ट्रपति पद के लिए डॉक्टर कलाम से अच्छा विकल्प कोई नहीं है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मान्यवर, मेरे विचार से इस समय राष्ट्रपति पद के लिए डॉक्टर कलाम से अच्छा विकल्प कोई नहीं है.</p>
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		<title>Comment on अवज्ञा और असहयोग के दौर में by अमित माथुर</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/01/%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87/#comment-3084</link>
		<dc:creator>अमित माथुर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 May 2012 07:28:58 +0000</pubDate>
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		<description>मान्यवर, शायद अपने सुना या देखा हो पाकिस्तान के एक टीवी चैनल दुनिया टीवी पर आजकल के हालात पर एक मजाहिया प्रोग्राम आता है 'हस्ब-ए-हाल' मुझे ये कार्यक्रम पसंद है और मैं इसे चैनल की वेबसाइट पर देखता हूँ. इस प्रोग्राम के होस्ट जुनैद सलीम ने जनरल की चिट्ठी वाले मामले पर बहुत अलग टिप्पणी की थी. उसे सुनकर मुझे अचम्भा हुआ की इस मामले का एक पक्ष ये भी हो सकता है. पाकिस्तान की नज़र से देखें तो जनरल साहब की चिट्ठी को लीक करने के पीछे का स्वार्थ ये है की हिंदुस्तान दुनिया में हथियारों का एक बहुत बड़ा खरीदार है. हिंदुस्तान की इस खरीद और हथियारों के ज़खीरो पर कोई ऊँगली  ना उठे इसी वजह से जनरल सिंह की चिट्ठी को लीक करवाया गया है की हिंदुस्तान के पास हथियार नहीं हैं. आपने बिलकुल सही कहा है की सरकार की चालो के पीछे का निहितार्थ बहुत विशेष होता है. वास्तव में यदि हम देखें तो सोनिया गांधी जी के सत्ता संभालने के बाद से भारत की राजनीति एक विशेष रंग लेने लगी है. हम हर तरफ देख रहे हैं की 'कुछ हो ही नहीं रहा'. जिस देश में एक वोट से सरकार गिर जाया करती थी और प्याज के दाम किसी प्रदेश में सरकार बनाने या बिगाड़ने के लिए पर्याप्त थे वहाँ हज़ारो करोड के घोटालों के बाद भी कोई हरकत नहीं है. मेरे विचार से भारतीय राजनीति के धुरंधरों को अब कुछ सक्रीय हो जाना चाहिए और अपने लिए सोचने की बजाये भारतीय राजनीति को बचाने और सवारने के लिए काम करना चाहिए. इसी क्रांति में अन्ना हजारे और उनकी टीम के रूप में भारत की जनता को एक आशा दिखाई देती है. सिर्फ अन्ना आन्दोलन ही आज के समय में ऐसा है जहाँ कम-से-कम 'कुछ हो तो रहा है'.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मान्यवर, शायद अपने सुना या देखा हो पाकिस्तान के एक टीवी चैनल दुनिया टीवी पर आजकल के हालात पर एक मजाहिया प्रोग्राम आता है &#8216;हस्ब-ए-हाल&#8217; मुझे ये कार्यक्रम पसंद है और मैं इसे चैनल की वेबसाइट पर देखता हूँ. इस प्रोग्राम के होस्ट जुनैद सलीम ने जनरल की चिट्ठी वाले मामले पर बहुत अलग टिप्पणी की थी. उसे सुनकर मुझे अचम्भा हुआ की इस मामले का एक पक्ष ये भी हो सकता है. पाकिस्तान की नज़र से देखें तो जनरल साहब की चिट्ठी को लीक करने के पीछे का स्वार्थ ये है की हिंदुस्तान दुनिया में हथियारों का एक बहुत बड़ा खरीदार है. हिंदुस्तान की इस खरीद और हथियारों के ज़खीरो पर कोई ऊँगली  ना उठे इसी वजह से जनरल सिंह की चिट्ठी को लीक करवाया गया है की हिंदुस्तान के पास हथियार नहीं हैं. आपने बिलकुल सही कहा है की सरकार की चालो के पीछे का निहितार्थ बहुत विशेष होता है. वास्तव में यदि हम देखें तो सोनिया गांधी जी के सत्ता संभालने के बाद से भारत की राजनीति एक विशेष रंग लेने लगी है. हम हर तरफ देख रहे हैं की &#8216;कुछ हो ही नहीं रहा&#8217;. जिस देश में एक वोट से सरकार गिर जाया करती थी और प्याज के दाम किसी प्रदेश में सरकार बनाने या बिगाड़ने के लिए पर्याप्त थे वहाँ हज़ारो करोड के घोटालों के बाद भी कोई हरकत नहीं है. मेरे विचार से भारतीय राजनीति के धुरंधरों को अब कुछ सक्रीय हो जाना चाहिए और अपने लिए सोचने की बजाये भारतीय राजनीति को बचाने और सवारने के लिए काम करना चाहिए. इसी क्रांति में अन्ना हजारे और उनकी टीम के रूप में भारत की जनता को एक आशा दिखाई देती है. सिर्फ अन्ना आन्दोलन ही आज के समय में ऐसा है जहाँ कम-से-कम &#8216;कुछ हो तो रहा है&#8217;.</p>
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	<item>
		<title>Comment on ठाकरे साहब, हम हिंदीवालों से सीखिए by अमित माथुर</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/15/%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82/#comment-3083</link>
		<dc:creator>अमित माथुर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 May 2012 07:11:49 +0000</pubDate>
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		<description>मान्यवर, उचित समय पर उचित लेख है. मैं किसी भी तरह भाषाई या क्षेत्रिये विद्वेष का पक्षधर नहीं हूँ मगर मेरे विचार से किन्ही विशेष परिस्थितियों में हमें कुछ अलग सोचना चाहिए. मुंबई को बिहार के विरोध करना पड़ रहा है वास्तव में यही विरोध दिल्ली भी कर रही है. बिहार के निवासियो को कोई दूसरा प्रदेश स्वीकार करने को तैयार ही नहीं है. वास्तव में बिहार की बुरी सरकारों ने प्रदेश का बेडागर्क कर दिया और बिहारवासियों को अपना घर-संसार छोड़कर दूसरे प्रदेशो में रोज़ी-रोटी के लिए जाना पड़ा. इस प्रक्रिया में दोनों मेट्रोपोलिटन शहर, चाहे वो दिल्ली हो या मुंबई नौकरियो की कमी का शिकार हुए. दिल्ली में पैदा होने वाला एक बच्चे को अपनी नौकरी में जितने पैसे चाहिए होते हैं एक बिहार से आया शख्स उसी काम को कम पैसे में कर लेता है क्यूंकि बिहार के जिस गाँव या शहर से वो आया है वहाँ ज्यादा पैसे की ज़रूरत नहीं है. इससे दोनों ही मेट्रो शहरों में बेरोज़गारी बढ़ गयी और उसका शिकार बिहार से आये हुए भाई हुए. कुछ इसी तरह का विरोध आस्ट्रलिया या ब्रिटेन में देखा जा रहा है. वहाँ भी हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश आदि से पढ़ने के लिए आये हुए छात्रों ने नौकरियों की कमी पैदा कर दी है. जिनका देश या राज्य है उन्हें तो नौकरी मिल नहीं रही क्यूंकि 'बाहर गाँव' से आये हुए लोग कम पैसे लेकर वो काम कर रहे हैं. मेरे विचार में ये विरोध केवल भाषाई नहीं है बल्कि 'पापी पेट' का झगडा है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मान्यवर, उचित समय पर उचित लेख है. मैं किसी भी तरह भाषाई या क्षेत्रिये विद्वेष का पक्षधर नहीं हूँ मगर मेरे विचार से किन्ही विशेष परिस्थितियों में हमें कुछ अलग सोचना चाहिए. मुंबई को बिहार के विरोध करना पड़ रहा है वास्तव में यही विरोध दिल्ली भी कर रही है. बिहार के निवासियो को कोई दूसरा प्रदेश स्वीकार करने को तैयार ही नहीं है. वास्तव में बिहार की बुरी सरकारों ने प्रदेश का बेडागर्क कर दिया और बिहारवासियों को अपना घर-संसार छोड़कर दूसरे प्रदेशो में रोज़ी-रोटी के लिए जाना पड़ा. इस प्रक्रिया में दोनों मेट्रोपोलिटन शहर, चाहे वो दिल्ली हो या मुंबई नौकरियो की कमी का शिकार हुए. दिल्ली में पैदा होने वाला एक बच्चे को अपनी नौकरी में जितने पैसे चाहिए होते हैं एक बिहार से आया शख्स उसी काम को कम पैसे में कर लेता है क्यूंकि बिहार के जिस गाँव या शहर से वो आया है वहाँ ज्यादा पैसे की ज़रूरत नहीं है. इससे दोनों ही मेट्रो शहरों में बेरोज़गारी बढ़ गयी और उसका शिकार बिहार से आये हुए भाई हुए. कुछ इसी तरह का विरोध आस्ट्रलिया या ब्रिटेन में देखा जा रहा है. वहाँ भी हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश आदि से पढ़ने के लिए आये हुए छात्रों ने नौकरियों की कमी पैदा कर दी है. जिनका देश या राज्य है उन्हें तो नौकरी मिल नहीं रही क्यूंकि &#8216;बाहर गाँव&#8217; से आये हुए लोग कम पैसे लेकर वो काम कर रहे हैं. मेरे विचार में ये विरोध केवल भाषाई नहीं है बल्कि &#8216;पापी पेट&#8217; का झगडा है.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on सचिन की सियासी पारी by अमित माथुर</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/28/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/#comment-3082</link>
		<dc:creator>अमित माथुर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 May 2012 06:25:39 +0000</pubDate>
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		<description>मान्यवर, मेरे विचार में महामहीम राष्ट्रपति द्वारा बारह रत्नों को चुने जाने का प्रावधान तो बहुत सकारात्मक पहलू था परन्तु आज की राजनैतिक परिस्थितियों में कोई भी संवैधानिक पद या सत्ता में कोई विशिष्ट स्थान एक विशेष प्रकार का प्रलोभन है. आपने सही कहा की जिस विचार और पहलू को ध्यान में रखकर बारह नामांकित सदस्यों को राज्यसभा में स्थान देने का प्रावधान था उसका मूल तत्व ही नष्ट हो गया है. सत्तारूढ़ पार्टी अपनी स्वार्थपूर्ती के लिए या शायद राज्यसभा को कथित तौर पर शक्तिहीन करने के लिए इस प्रकार के सदस्यों को नामांकित करवा देती है जो कम-से-कम सरकार के नियम-निर्देशों का विरोध ना करें. जिस देश में महामहीम राज्यपाल जैसे वरिष्ठ पद को सुशोभित करने के लिए चुने गए 'जननायक' ये कहें की उन्हें ये पद पार्टी की सेवा का इनाम है वहाँ राज्यसभा के इन बारह पदों को पुरूस्कार या प्रलोभन की तरह बांटा जाना भी संभव है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मान्यवर, मेरे विचार में महामहीम राष्ट्रपति द्वारा बारह रत्नों को चुने जाने का प्रावधान तो बहुत सकारात्मक पहलू था परन्तु आज की राजनैतिक परिस्थितियों में कोई भी संवैधानिक पद या सत्ता में कोई विशिष्ट स्थान एक विशेष प्रकार का प्रलोभन है. आपने सही कहा की जिस विचार और पहलू को ध्यान में रखकर बारह नामांकित सदस्यों को राज्यसभा में स्थान देने का प्रावधान था उसका मूल तत्व ही नष्ट हो गया है. सत्तारूढ़ पार्टी अपनी स्वार्थपूर्ती के लिए या शायद राज्यसभा को कथित तौर पर शक्तिहीन करने के लिए इस प्रकार के सदस्यों को नामांकित करवा देती है जो कम-से-कम सरकार के नियम-निर्देशों का विरोध ना करें. जिस देश में महामहीम राज्यपाल जैसे वरिष्ठ पद को सुशोभित करने के लिए चुने गए &#8216;जननायक&#8217; ये कहें की उन्हें ये पद पार्टी की सेवा का इनाम है वहाँ राज्यसभा के इन बारह पदों को पुरूस्कार या प्रलोभन की तरह बांटा जाना भी संभव है.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on दरकती हवेलियों-सी राष्ट्रीय पार्टियां by rashmi ranjan</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/22/%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d/#comment-3081</link>
		<dc:creator>rashmi ranjan</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 May 2012 15:53:24 +0000</pubDate>
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		<description>behad बढ़िया. मेरे ख्याल से ये दीपक ke भुजने से पहले की bhabakhti आग है. पार्टियाँ अपनी ज़िमादारी नहीं समझ रही हैं aur उन्हें इसका खामियाजा भुगतना ही padega</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>behad बढ़िया. मेरे ख्याल से ये दीपक ke भुजने से पहले की bhabakhti आग है. पार्टियाँ अपनी ज़िमादारी नहीं समझ रही हैं aur उन्हें इसका खामियाजा भुगतना ही padega</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on सचिन की सियासी पारी by Bhanuprasad Thaker</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/28/%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80/#comment-3078</link>
		<dc:creator>Bhanuprasad Thaker</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Apr 2012 22:21:47 +0000</pubDate>
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		<description>यह एक सुनदर  लेख है.आपके विचर से सहमत हूँ.लेजिन राजनीती विचरों  से नहीं चलती है 
मतदाता किसको वोते देगा ये भी निशित नहीं है.नेता व्यवस्था नहीं बदलना चाहते.जितना पैसा 
रिश्वत में लिया गया है उससे देश की कायाकल्प हो सकता है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह एक सुनदर  लेख है.आपके विचर से सहमत हूँ.लेजिन राजनीती विचरों  से नहीं चलती है<br />
मतदाता किसको वोते देगा ये भी निशित नहीं है.नेता व्यवस्था नहीं बदलना चाहते.जितना पैसा<br />
रिश्वत में लिया गया है उससे देश की कायाकल्प हो सकता है.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on इन आत्मघाती विवादों को रोकिए by Bhanuprasad Thaker</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/08/%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a5%8b/#comment-3057</link>
		<dc:creator>Bhanuprasad Thaker</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Apr 2012 02:14:02 +0000</pubDate>
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		<description>शेखार्गुप्ता ने इन्दिअनेक्ष्प्रेस्स में समाचार छपा था उन पैर करवाई होनी चाहिए.बकवास थी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शेखार्गुप्ता ने इन्दिअनेक्ष्प्रेस्स में समाचार छपा था उन पैर करवाई होनी चाहिए.बकवास थी.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on अवज्ञा और असहयोग के दौर में by pramod kumar</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/04/01/%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87/#comment-3048</link>
		<dc:creator>pramod kumar</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Apr 2012 16:54:52 +0000</pubDate>
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		<description>jo log mahan hote hain we apani pida ko muskurahat men vyakt karate hain.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>jo log mahan hote hain we apani pida ko muskurahat men vyakt karate hain.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>Comment on आकांक्षाओं के आकाश पर अखिलेश by Dr. Utsawa K. Chaturvedi, Cleveland, USA</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/03/10/%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%96%e0%a4%bf/#comment-3033</link>
		<dc:creator>Dr. Utsawa K. Chaturvedi, Cleveland, USA</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Mar 2012 10:00:33 +0000</pubDate>
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		<description>अभी तो चश्मे इबरत वक्त की रफ्तार देखेगी,
अभी ये किस कदर कह दें की परवानों पे क्या गुज़री.
डा ० उत्सव कुमार चतुर्वेदी, क्लीवलैंड, अमेरिका</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तो चश्मे इबरत वक्त की रफ्तार देखेगी,<br />
अभी ये किस कदर कह दें की परवानों पे क्या गुज़री.<br />
डा ० उत्सव कुमार चतुर्वेदी, क्लीवलैंड, अमेरिका</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on ‘वीआईपी सिंड्रोम’ के विरोध में by Dr. Utsawa K. Chaturvedi, Cleveland, USA</title>
		<link>http://blogs.livehindustan.com/pyaali-me-tufaan/2012/01/30/%e2%80%98%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%86%e0%a4%88%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e2%80%99-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0/#comment-3014</link>
		<dc:creator>Dr. Utsawa K. Chaturvedi, Cleveland, USA</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Feb 2012 11:23:17 +0000</pubDate>
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		<description>सब के मुंह में हैं ज़ुबाने , बोलता कोई नहीं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सब के मुंह में हैं ज़ुबाने , बोलता कोई नहीं.</p>
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