परिचय

नवीन जोशी
एग्जक्यूटिव एडिटर, हिन्दुस्तान, लखनऊ

जोशी जी, जो 53 वर्ष में भी ‘नवीन’ ही हैं, पहाड़ के किसी गाँव-कस्बे के स्कूल में मास्टर बनने का सपना देखते थे। सो, 1975 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बी एससी करने के बाद एम ए (अर्थशास्त्र) में दाखिला लिया। लेकिन इमरजेंसी के तत्काल बाद पत्रकारिता का ऐसा चस्का लगा कि आज 32 वर्ष हो गए, पहाड़ नहीं लौट पाने का मलाल तो उन्हें है लेकिन पत्रकारिता में आ पड़ने का कतई पछतावा नहीं। अशोक जी और राजेन्द्र माथुर को गुरु मानने वाले जोशी जी ‘स्वतंत्र भारत’, ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ में विविध जिम्मेदारियाँ निभाते हुए विज्ञान, राजनीति, पर्यावरण और खासकर आम जन की विडंबनाओं और जीवन के विद्रूपों पर कलम चलाते रहे। इस बीच दो कथा संग्रह और एक उपन्यास भी छप गए। यूँ जोशी जी को आप लेखक-पत्रकार नहीं, भावुक इनसान पाएंगे।

सन 2003 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘एम एफ हुसेन की कहानी, अपनी जुबानी’ को रिलीज करने एम एफ हुसेन पटना भी आए थे। मैं उन दिनों पटना ही था और हुसेन के साथ एक कप कॉफी पीने का मौका हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक की हैसियत से मुझे भी मिला। हुसेन प्रशंसकों से घिरे थे, अलग से कुछ बातें करने का अवसर नहीं था। फिर भी हुसेन से मिलना रोमांचक अनुभव था। उन्होंने मुझे भी अपनी आत्म कथा की एक प्रति दी और हमारे एक साथी के आग्रह पर हिन्दुस्तान के पाठकों के लिए प्यार लिख कर अपने हस्ताक्षर कर दिए थे जिसे हमने अखबार के अगले अंक में छापा भी था। [Read more]

-‘बच्चे का रिजल्ट कैसा रहा?’ हमने एक साथी से फोन पर पूछा।
-‘अरे, यार..। ’ उनकी आवाज में अफसोस था- ‘89%..। थोड़ा और मेहनत करता तो..। 89 परसेण्ट पर भी एक पिता का यह निराशा भरा स्वर हमें भीतर तक हिला गया। हमने उन्हें घर जाकर बधाई दी। बच्चे को एक किताब उपहार में दी। लेकिन उस परिवार के चेहरों से मलाल नहीं गया। [Read more]

यह सचमुच आस्ट्रेलिया का सुनहरा तट है, एक और बहुत सुन्दर शहर। कोई 70 किमी. का विशाल समुद्री तट और साल में लगभग 300 दिन धूप से नहाए पुरसुकून बीच। दूर-दूर तक प्रशान्त महासागर का विस्तार। आसमान छूती अट्टालिकाएँ, जिनमें 77वीं मंजिल तक रिहायश वाले क्यू-1 टावर की 78वीं मंजिल से जो विराट और दिव्य दर्शन होते हैं तो पता चलता है कि इस शहर का नाम ‘गोल्ड कोस्ट’ क्यों पड़ा। [Read more]

हाल की भारी वर्षा से उफनाई बैरन नदी भयानक शोर के साथ सैकड़ों फुट गहरी खाई में गिर रही है और वाष्प-कणों से भरा घना सफेद कोहरा खाई से ऊपर उठकर हरे-भरे जंगल में छा रहा है। पूरी की पूरी नदी को एक गहरी खाई में गिरते देखना रोमांचक दृश्य है। [Read more]

आस्ट्रेलिया के चार शहरों की यात्रा में हमारा पहला पड़ाव सिडनी था और पहला ही साक्षात्कार सिडनी ओपेरा हाउस की सम्मोहित कर देने वाली डिजाइन से होता है। क्या ही खूबसूरत इमारत है। जितनी बार जितने कोणों से देखिए इसका नया ही आकर्षक रूप सामने आता है और यह तो हमें दूसरी शाम पता चला कि सिडनी ओपेरा हाउस का असली, भव्य दर्शन तो समुद्र में थोड़ा दूर जाकर होता है। [Read more]