परिचय

ब्लॉग बस्ती के इस बगीचे में आप पाएंगे लेखन की कुछ नई खुशबुएं। नई सोच के कुछ लोग जो घटनाओं पर भंवरों की तरह मंडराएंगे और उनकी गंध आप तक पहुंचाएंगे। मधुमक्खियों के इस दस्ते में सबके पास डंक हैं, लेकिन उनकी चुभन आपके लिए नहीं,  समाज के विलेनों के लिए होगी। आपके लिए तो वे बस शहद एकत्र करेंगे. . . ।  पेश हैं हिंदुस्तान परिवार के कुछ ऐसे उभरते लेखक जो कांटे चुभने पर सिस्टम को नहीं कोसते, बल्कि कलम उठाकर परिवर्तन सुझाने लगते हैं. . ।

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

ये रचना उन नौजवानों के लिए लिखी मैंने ….जो सिर्फ ख़्वाबों की दुनिया में रहते हैं….उसी में अपना अच्छा बुरा सोचते हैं…उसी में अपना भविष्य तय कर लेते हैं….जबकि सच में कुछ नहीं कर रहे होते ….मैं चाहता हूँ कि वो ख्वाब देखें….क्यूंकि ख्वाब के बिना ज़िन्दगी में आगे बढ़ना नामुमकिन है… [Read more]

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

मैं चला था -
मंजिलों को हाथ में ले कर।
नई उड़ान भर कर -
कुछ दूर उड़ा भी था।
फिर एक टक निहारा -
अतीत को अपने!
जो ज़ुबां से खामोश,
एहसासों से जुदा भी था। [Read more]

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

चार दिवारी से बहार निकले,
तो हवा के छूने का एहसास हुवा.
कुछ चमक सूरज की -
आँखों को चका-चोंध करने लगी.
आंखें खुलने से पहले ही बंद होती दिखीं. [Read more]

गुफ्तगू- अजय शर्मा

यह कॉलम लिखने की प्रेरणा मुझे सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर पर लिखी जाने वाली कुछ पोस्ट और उन पर की जाने वाली प्रतिक्रियाओं से मिली। पिछले कुछ सालों में फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स की लोकप्रियता तेजी के साथ बढ़ी है। कुछ सवाल अक्सर मुझे सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं। [Read more]

सौरभ सुमन, गलियां
सुना है आजकल शहद और नारियल पानी की देश में मांग बढ़ गई है। शायद साउथ के किसानों के चेहरों पर शहद और नारियल पानी में पाए जाने वाले प्राकृतिक चीजों का असर भी शायद अब दिखने लगे। मांग में तेजी के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। [Read more]