परिचय

ब्लॉग बस्ती के इस बगीचे में आप पाएंगे लेखन की कुछ नई खुशबुएं। नई सोच के कुछ लोग जो घटनाओं पर भंवरों की तरह मंडराएंगे और उनकी गंध आप तक पहुंचाएंगे। मधुमक्खियों के इस दस्ते में सबके पास डंक हैं, लेकिन उनकी चुभन आपके लिए नहीं,  समाज के विलेनों के लिए होगी। आपके लिए तो वे बस शहद एकत्र करेंगे. . . ।  पेश हैं हिंदुस्तान परिवार के कुछ ऐसे उभरते लेखक जो कांटे चुभने पर सिस्टम को नहीं कोसते, बल्कि कलम उठाकर परिवर्तन सुझाने लगते हैं. . ।

बेलाग - हितेश शंकर

काम-काजी दिन की व्यस्त शुरुआत के बीच हाईकोर्ट के बाहर दिल-दहलाने वाला धमाके के साथ ही चीख-पुकार और भारी अफरा-तफरी का माहौल। लहूलुहान लोगों को सहारा देते मददगार इतने नहीं हैं जितने तमाशबीन। हादसे के बाद सनसनी तलाशती भीड़ मौके पर जम जाती है। [Read more]

आप भी कुछ कहिए- सुजीत कुमार
जब सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे दिल्ली के रामलीला मैदान में या अनशन के लिए बैठे तो लोगों का हुजूम उनको देखने के लिए पहुंचा। आखिर हो भी क्यों नहीं, अन्ना एक ऐसे मसले को लेकर बैठे थे जिससे भारत की हरेक जनता परेशान है। हर जगह भ्रष्टाचार है और उसी को खत्म करने के लिए अन्ना एक प्रभावी लोकपाल की मांग कर रहे हैं। [Read more]

गुफ्तगू- अजय शर्मा

यह कॉलम लिखने की प्रेरणा मुझे सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर पर लिखी जाने वाली कुछ पोस्ट और उन पर की जाने वाली प्रतिक्रियाओं से मिली। पिछले कुछ सालों में फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स की लोकप्रियता तेजी के साथ बढ़ी है। कुछ सवाल अक्सर मुझे सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं। [Read more]

बस यूं ही- दिगपाल सिंह। भारत सरकार के अनुसार अगर आप दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में रहते हैं और चार लोगों के परिवार के खाने पर 32 रुपए खर्च करते हैं तो आप गरीब नहीं है। यही नहीं छोटे शहरों और गांवों में 26 रुपए खर्च करने वाला परिवार गरीब नहीं होता। [Read more]

सौरभ सुमन, गलियां
सुना है आजकल शहद और नारियल पानी की देश में मांग बढ़ गई है। शायद साउथ के किसानों के चेहरों पर शहद और नारियल पानी में पाए जाने वाले प्राकृतिक चीजों का असर भी शायद अब दिखने लगे। मांग में तेजी के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। [Read more]