ये रचना उन नौजवानों के लिए लिखी मैंने ….जो सिर्फ ख़्वाबों की दुनिया में रहते हैं….उसी में अपना अच्छा बुरा सोचते हैं…उसी में अपना भविष्य तय कर लेते हैं….जबकि सच में कुछ नहीं कर रहे होते ….मैं चाहता हूँ कि वो ख्वाब देखें….क्यूंकि ख्वाब के बिना ज़िन्दगी में आगे बढ़ना नामुमकिन है… [Read more]
परिचय
मैं चला था -
मंजिलों को हाथ में ले कर।
नई उड़ान भर कर -
कुछ दूर उड़ा भी था।
फिर एक टक निहारा -
अतीत को अपने!
जो ज़ुबां से खामोश,
एहसासों से जुदा भी था। [Read more]
चार दिवारी से बहार निकले,
तो हवा के छूने का एहसास हुवा.
कुछ चमक सूरज की -
आँखों को चका-चोंध करने लगी.
आंखें खुलने से पहले ही बंद होती दिखीं. [Read more]
यह कॉलम लिखने की प्रेरणा मुझे सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक और ट्विटर पर लिखी जाने वाली कुछ पोस्ट और उन पर की जाने वाली प्रतिक्रियाओं से मिली। पिछले कुछ सालों में फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स की लोकप्रियता तेजी के साथ बढ़ी है। कुछ सवाल अक्सर मुझे सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं। [Read more]
सौरभ सुमन, गलियां
सुना है आजकल शहद और नारियल पानी की देश में मांग बढ़ गई है। शायद साउथ के किसानों के चेहरों पर शहद और नारियल पानी में पाए जाने वाले प्राकृतिक चीजों का असर भी शायद अब दिखने लगे। मांग में तेजी के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। [Read more]

