आप भी कुछ कहिए

20

सुजीत कुमार

सुजीत कुमार

लेखक परिचय
लाइवहिंदुस्तान के सीनियर कॉपी एडिटर सुजीत कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय में हिस्ट्री पढ़ते-पढ़ते कब जर्नलिज्म की तरफ मुड़ गए, खुद उन्हें भी पता नहीं चला। पिछले छह वर्षो में प्रिंट और वेब पत्रकारिता की गलियों ने उन्हें खासा संवेदनशील बना दिया है। जीवन के जिस पहलू में उन्हें कुछ विरोधाभासी नजर आता है, उसी को अपनी कलम का निशाना बना लेते हैँ.  .  . .

ब्लॉग परिचय
एक ऐसा फोरम जिस पर सिर्फ कहा नहीं जाएगा, सुना भी जाएगा। इस दोतरफा ट्रैफिक की गिरफ्त में वे तमाम मुद्दे आएंगे जो रोजमर्रा की जिंदगी में हमसे टकराते हैं लेकिन फांस की तरह दिल में अटककर रह जाते हैं ..

20 Responses to “आप भी कुछ कहिए”

  1. hindi men blog kaise likha jaye?

    [Reply]

    admin Reply:

    रागिनी जी, इसके लिए अगर आपको हिंदी टाइपिंग आए तो बेहतर होगा। अगर नहीं आती तब भी आप http://www.google.com/transliterate/ साइट पर जाकर इंग्लिश टाइप करेंगी तो अपने आप हिंदी में हो जाएगा। लेकिन अच्छा यही होगा कि आप हिंदी टाइपिंग सीखें तो आसानी होगी। धन्यवाद।

    [Reply]

  2. एक लम्बे अर्से से अलग- अलग प्रांतों के विभाजन कि खबरें अखबारों कि सुर्खियों मे आ रही है। अब तक मैने खबरें ही पढ़ी थी, लेकिन जब आज पहली बार ब्लॉग पढ़ने कि शुरुआत कि तब लोगों कि व्यक्तिगत भावानओ को जानने का अवसर मिला। अचम्भा हुआ कि जिस दूषित विचारधारा के प्रतिपादको कि सरेआम निंदा होना लाजिमी है, उनकी कुंठाएं किस कदर कुछ आम जनों पार हावी हो रही है। एक जनाब एक और बाल ठाकरे कि मंशा जाहिर करते है। कमाल है हम कैसे किसी जगह के बदहाली के लिए कुछ खास लोगो को बेहिचक कटघरे मे ला सकते है? मुंबई कि भीड़ और दिल्ली की गंदगी के लिए केवल गैर दिल्लीवासियों को दोष मढ़ना कितना उचित है, इसे समझना और समझाना दोनो जरूरी है।

    “अनेकता मे एकता” ये भारत की पहचान है, तो भारत का दर्शन “वसुधैव कुटुम्ब्कम्” पूरी दुनिया को प्रेरणा देता है,ये भारत ही है जिसने “तोडो नहि जोडो” को प्रमाणित कर दिखाया। जिस देश मे अब तक बिखराव कि कोइ परंपरा नहीं रही। क्या भगत और अशफाक कि आहूतियां आज के इसी भारत के लिए थी, जहा देश भाव के ऊपर प्रांतीयता को महत्व दिया जाने लगा है। क्या बापू का देश को समर्पण इसलिये था कि अंग्रज के कोड़ों से छलनी होने वाला भारत अपने ही आने वाले पीढ़ियो के प्रांतीय विद्वेष से खंड- खंड हो कर आहत हो? आज भी जब देश किसी आन्तरिक या बह्य आपदाओ से जूझ रहा होता है तब पूरा देश एक भाव से एक साथ खडा मिलता है। क्या कोइ यह साबित कर सकता है कि देश कि उन्नति मे केवल फलां प्रान्त का ही योगदान है, य फिर आजादी कि अर्ध शताब्दी वर्षों के बाद भी हम आज तक “विकासशील राष्ट्र” का तमगा लिए घूम रहे है तो इसके लिये कोइ खास प्रान्त ही जिम्मेदार है। नही देश कि सम्पन्न्ता-विपन्न्ता पूरे देश कि समूहिक जिम्मेदारी है।

    बिहार-यूपी के लोगो पर आरोप है कि ये दूसरे रज्यो मे भीड़ फैलाकर वहा के मूलवासियो का रोजगार हडप जाते है। इस तर्क के आधार पर ऑस्ट्रेलिया मे भारतीयों पर हमले ओर अब अमेरिका द्वरा भारतीयों को रोजगार न देने का फैसला सराहनीय घोषित किया जाना चाहिए। लेकिन यहां तो सभी आलोचना ही कर रहे हैं। ये बाहरी मुल्क क्यूं न कहें कि ” वे कत्ल भी करते है तो चर्चा नहीं होती, हम आह भी भरते है तो हो जाते हैं बदनाम।

    भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को देश के किसी भी कोने मे जाने, रहने और रोजगार पाने का अधिकार देता है। संविधान प्रदत्त इस अधिकार को चुनौती -ये कैसा देश प्रेम है? पान के पीको और गुटखा के छीटों से गंदगी फैलना वाकई गलत है, लेकिन इसके लिए केवल किसी एक को दोष देना उससे भी ज्यादा गलत। अगर सफाई के नाम पर बिहरियो का बिहार मे ही सिमट जाना इनकी सजा है, तो फिर भू-मन्डल को दूषित करने की सजा के रूप मे हमसे जीने का अधिकार छिन जारता है। पेडो को काट कर घर सजाया, लग्जरी कार के धुएं मे अपनी विलासिता फैलाई, एसी व रेफ्रिजिरेटर कि शीतलता से ओजोन कि परत छेदी, हमारी सजा तो यही बनती है न कि हम पृथ्वी का परित्याग करे।
    सच है कि बिहार को उन्नत होने मे अभी और वक्त लगेगा, लेकिन जिन्हें बिहरियों से घॄणा है, वो बिहार का इतिहास देखें, जिसमें भारत का सुंदर भविष्य समाया है।

    अन्त मे मेरा मत यही है- हम बदलेंगें जग बद्लेगा, हम सुधरेंगे जुग सुधरेगा। प्रांतीयता के संकुचित दायरे से बाहर आ कर देखो पूरा भारत एक लगेगा। फिर सारे बैर मिटेंगे, और सब केवल भारत के लिए सोचेंगे।

    [Reply]

    सूजीत कुमार Reply:

    आपने बहुत बेहतरीन लिखा है। अच्छी सोच और बहुत ही सूचनाप्रद। मैंने आपका कमेंट अपने प्रोफाइल से हटाकर लेख के ठीक नीचे लगा दिया है। ऐसे ही लिखते रहिए। धन्यवाद

    [Reply]

    Ragini Kumari Reply:

    धन्यवाद मेरी भावनाओ को सराहने के लिये। ब्लाग पर यह मेरा पहला प्रयास था, आपकि सराहना से मुझे अगले प्रयास की प्रेरणा मिली है।

    [Reply]

    सुजीत कुमार Reply:

    रागिनी जी आप लिखना चाहती हैं, यह सराहनीय है। हमलोग जल्द ही सिटीजन जर्नलिज्म के तहत आपलोगों से भी आपके लेख आमंत्रित करेंगे। लेकिन फिलहाल अलग टॉपिक पर लिखने की सहूलियत देने में अक्षम हैं, इसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हूं, लेकिन जल्द ही आपको यह सुविधा मुहैया हो जाएगी। तब तक आप ब्लागस्पाट.कॉम पर जाकर अपना ब्लॉग बना सकती हैं, जहां आप अपने लेखों को प्रकाशित कर अपने दोस्तों को लिंक भेज सकती हैं और उनके कमेंट आमंत्रित कर सकती हैं। धन्यवाद

    ANOOP Reply:

    बहुत ही अच्छा सराहनीय लेख है ये मई आपसे पूरी तरह सहमत हूँ ,आप ऐसे ही प्रयाश जरी रखिये .आपका धन्यवाद इस के लिए .

    @नूप

    [Reply]

  3. Shahid Mahmood Says:

    रागिनी जी मैं आप से पूरी तरह सहमत हूँ, बहुत दुःख की बात है की जो देश एक बार बटवारे का दंश झेल चूका हो वहां के लोग फिर से बटवारे की बात करें, वास्तव में ये यहाँ के नेताओं की प्रविर्ती है, किसी ज़माने में राजनीती समाज सेवा का नाम हुआ करता था, लेकिन अब ये एक व्यवसाय बन चुका है, और अपने अपने प्रोडक्ट क प्रोमोशन के लिए नेता लोग कुछ भी करने को तैयार रहते हैं, ध्यान रहे जो कभी विचारधारा कहलाते थे उसी को मैं प्रोडक्ट कह रहा हूँ. बहुत दुःख के साथ कहना पड़ता है की जिन्नाह से तो इस देश को 1947 में छुटकारा मिल गया था लेकिन उनकी विचारधारा हमारे देश में आज भी जीवित है, और हमारे नेता गण उसको हरा भरा रखने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध हैं, मगर उससे भी ज्यादा दुखद बात ये है की हम लोग जागरूक नहीं हैं, हम जिस भी विचारधारा का समर्थन करते हैं उसके समर्थन में बिलकुल अंधे हो जाते हैं, और इसी बात का फायदा नेता गण उठाते हैं, मैं उनलोगों से पूछना चाहता हूँ जो अलग राज्य की मांग कर रहे हैं की किस तरह से यदि अलग राज्य बना दिया जाए तो उनका उत्थान हो जाएगा? क्या वो लोग उन राज्यों की जनता का हाल नहीं जानते जो कुछ वर्ष पहले अलग हुए हैं? हाँ उन राज्यों के नेता ज़रूर मालामाल हो चुके हैं। 1974 याद हो तो. किसी कवि ने क्या खूब कहा है :
    मुत्ताहिद हो तो बदल दोगे निजाम-ए-आलम,
    मुंतशिर हो तो मरो, शोर मचाते क्यों हो।।

    [Reply]

  4. Ragini Says:

    सुजीत जी, क्या मैं अपने अन्य रचनाओं को आपके ब्लॉग पर डाल सकती हूं, जबकि वे आपके ब्लॉग में प्रकाशित रचनाओं से अलग शीर्षक अलग शीर्षक वाले हों?

    [Reply]

  5. manisha Says:

    यह जान कर बहुत प्रसन्नता हुई की भले ही हमारे देश मैं जातीय और प्रांतीय भावनाओ के आधार पर अपनी रोटी सेंकने वालो की कमी नहीं है। वहीं एक और आप जैसे लोग भी हैं, जो आज भी देश की एकता और अखंडता के बारे में सोचते है और उसे कायम रखने के लिए प्रयासरत है. आशा करती हूँ की आपकी यह सोच देश को तोड़ कर शासन करने में यकीन रखनेवालों को सोचने पर मजबूर करेंगें, अपने इस प्रशंसनीय विचार को हम और सभी तक पहुचने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद.

    [Reply]

  6. Vinay Says:

    आपने बहुत बेहतरीन लिखा है. आपके विचार प्रशंशनीय हैं. आपकी भाषा और शैली काबिले तारीफ है .

    [Reply]

  7. how can i write blog on this site and post it.

    [Reply]

    सुजीत कुमार Reply:

    हमलोग जल्द ही सिटीजन जर्नलिज्म के तहत आपलोगों से भी आपके लेख आमंत्रित करेंगे। लेकिन फिलहाल आपको यहां अपने लेख लिखने की सहूलियत नहीं है। लेकिन जल्द ही आपको यह सुविधा मुहैया हो जाएगी।

    [Reply]

  8. Shahid Mahmood Says:

    धन्यवाद, ये हमारे देश के वातावरण की विशेषता है, वहां की मिटटी एक दुसरे से प्यार करने वाली संतानें उपजती है, यही भारत वर्ष का इतिहास रहा है, अब ये हम पर निर्भर करता है की हम क्या स्वीकार करते हैं, इस लिए के मानव जीवन व्यतीत करने के दो रास्ते हैं एक अच्छाई का दूसरा बुराई का. अभी शाहरुख़ खान की मिसाल सामने है पूरा देश उनके साथ खड़ा हो गया, और बेचारे बाला साहेब अकेले पर गए. बस आप लोग ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहे, कहीं भी किसी जगह पर किसी को भी देश प्रेम में कुछ भी करते देखें उसका हौसला बढ़ाएं.

    [Reply]

  9. Yogesh Says:

    can you write about “police ghoos”?

    [Reply]

    सुजीत कुमार Reply:

    योगेश जी नमस्कार। मैं जल्द ही पुलिस घूसखोरी के ऊपर कुछ लिखूंगा। मुझे आप इस लायक समझते हैं इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।

    [Reply]

  10. लोग अपने देश के प्रदेश-विशेष के नागरिकों को निम्न समझकर उनका अपमान करते हैं| उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे जैसे, वो भारत के नागरिक ही नही हैं| तो भला! प्रादेशिक अलगाववाद और भाषाई आधार पर अत्याचार करने वाले उन चन्द पृथकतावादी एवं ‘शिक्षित मूर्खों’ और हम मे क्या अंतर रह जाएगा? इस तरह की घटनाएँ भी तो सामाजिक एकरूपता एवं शांति प्रभावित करती है I
    मुझे नही लगता है की वास्तव में कोई शिक्षित व्यक्ति राज ठाकरे जैसे नेताओं के ओछी और आधारहीन बातों पर गौर करता होगा क्योंकि, एक शिक्षित व्यक्ति इन घटनाओं के पीछे छुपे हुए वास्तविकता से परिचित होता है| लेकिन, जब ऐसे लोगों की जरूरत मह्शूश करने वाले लोगों पर विदेशों में अत्याचार होता है, तब उन्हें यह अहसास होता होगा की अपने आखिर अपने ही होते हैं अगर आप अपने देशवाशियों की इज्ज़त नही करेंगे तो क्या देश के बाहर का व्यक्ति आपकी इज्ज़त करेगा?
    वास्तव में, हम अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हैं मगर अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन या यू कहे तो गलत नही होगा कि, हम ‘पूर्ण रूप से स्वार्थी’ और संवेदनहीन हो चुके हैं. ऐसी घटनाओं पर लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए धन्यवाद!!

    [Reply]

  11. satish kunar Says:

    bilul sahi likha hai aapne

    [Reply]

  12. RAKESH KUMAR JHA Says:

    आज बिहार दिवस के मौके पर फिर से कुछ लिखने को मन कर रहा है, आज इस सुख का प्रत्यछ अनुभव सुबह आख खुलते ही हुई जब समाचारपत्रों के माध्यम से कुछ और अधिक पढने को एवं जानने को मिला , सच में बिहार के रगों में अब जीवन के सब रस घुल चुके है और अब जो रस घुलेंगे वो इसे और मीठा ही बनायेंगे ये मेरी शुभकामना बिहार दिवस क मौके पर तमाम बिहार वासियों से है I अपने दिल कि बातो को इन पंक्तियों क माध्यम से कहना चहुँगा कि
    “युवाशक्ति के शंखनाद से शुरु हुआ बिहार में कर्मयुद्ध,
    छायी है इक नई चेतना जाग रहा है वर्ग प्रबुद्ध!
    दामन में तुफ़ा को समेटे अन्याय से कभी न डरते,
    पर्वत के अब सर को झुका के बदल देंगे ये अब हवा का रुख!
    युवाशक्ति के शंखनाद से शुरु हुआ बिहार में कर्मयुद्ध!!
    आया है इक नया सवेरा हटा यहाँ से अब तम का डेरा,
    आखों में चिंगारी भरके करेंगे यहाँ नव सृजन युग!
    इस धरती के लाल बढे अब खुशियों के हर फूल खिले अब,
    गर्व से अपने सर को उठा के जन्म लेंगे फिर यहीं से बुद्ध!
    युवाशक्ति के शंखनाद से शुरु हुआ बिहार में कर्मयुद्ध!!”
    जय बिहार, जय भारत!!

    [Reply]

    ANOOP Reply:

    बहु ही अच्छी कविता लिख डाली आपने पढ़ कर अच्छा लगा .

    धन्यबाद

    [Reply]

Tell us what you're thinking...