अजय शर्मा, कॉपी एडिटर

इस ब्लॉग में बात होगी आपकी-हमारी जिंदगी से जुड़े कुछ खास और आम मुद्दों की, मानवीय संवेदनाओं की। जिंदगी के देखे अनदेखे पहलुओं की। मनोरंजन और उससे जुडे़ लोगों पर भी बेबाक राय रखेंगे। बात होगी इंसान की और हिंदुस्तान की।

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

ये रचना उन नौजवानों के लिए लिखी मैंने ….जो सिर्फ ख़्वाबों की दुनिया मे रहते हैं….उसी में अपना अच्छा बुरा सोचते हैं…उसी में अपना भविष्य तय कर लेते हैं….जबकि सच में कुछ नहीं कर रहे होते ….मैं चाहता हूं कि वो ख्वाब देखें….क्योंकि ख्वाब के बिना ज़िन्दगी मे आगे बढ़ना नामुमकिन है…लेकिन अपनी वर्तमान परिस्थितियों को जानते हुए….और अपनी क्षमताओं को और पक्का करते हुए आगे बढें…!!….ये रचना एक कोशिश है इस बात पर गौर कराने के लिए…! Read more

बस यूं ही- दिगपाल सिंह
कॉमनवेल्‍थ गेम्स शुरू होने से ठीक पहले दिल्ली को एक और टूरिस्ट स्पॉट मिल गया। इस नए टूरिस्ट स्पॉट पर लोग अपने पूरे परिवार सहित गाड़ियों में सवार होकर आ रहे हैं। इधर से गुजरते लोगों में भी दिल्ली के इस नये-नवेले टूरिस्ट स्पॉट को देखकर खुशी और हैरत का मिश्रित भाव है। हर कोई इसे जी भर के निहार लेना चाहता है, क्या पता फिर ऐसा नजारा कब देखने को मिले! ये भी नहीं पता कि मिलेगा भी या नहीं! एक बात तो तय मानी जा रही है कि कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले ही यह टूरिस्ट स्पॉट अपनी यह सुंदरता खो देगा। Read more

शहर की तंग गलियों में घूमते-घूमते अचानक मन में खयाल आया कि कुछ भी कहें हम भारतीय प्रजातंत्र के पक्के अनुयायी हैं। तभी तो हम दुनिया में फक्र से कहते हैं कि हम सबसे बड़े प्रजातंत्र हैं। हमें जितने अधिकार प्राप्त हैं औरों को नहीं। इस प्रजातंत्र के विरासत को बनाए रखने में हमने एसे ही झंडे थोडे ही गाड़े हैं। हमने कुछ अलग हटकर अपनी पहचान बनाई है। Read more

सौरभ सुमन
सब एडिटर, हिन्दुस्तान

बड़े अरमानों से रखा है ‘सनम’ तेरी कसम, ब्लॉगिंग की दुनिया में ये पहला कदम.. जी हां, मेरे लिए ‘सनम’ आप तमाम पाठक हैं जिनके साथ मैं कुछ पल बिताना चाहता हूं, अपनी बात कहना चाहता हूं, आपसे बात करना चाहता हूं। ‘सनम’ को अपना परिचय क्या दूं उम्मीद है वो मेरी बातों से ही मुझे पहचान लेंगे। आखिर सनम जो ठहरे। तो आप तमाम पाठकों से अपनी बात कहने के लिए ब्लॉगिंग की गलियों में खाक छान रहा हूं।

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

ये पंक्तियां नक्सलियों से जूझ रहे जवानों और उनके परिवारवालों को समर्पित हैं। जिनको अपना भविष्य अंधकारमय नज़र आ रहा है. उनको आगे कर दिया जाता है बिना किसी योजना के….बिना पूरी जानकारी के…एक मरे या चालीस किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता…फर्क पड़ता है तो राजनैतिक लाभ को…राजनेताओं को…राजनीति को…! Read more

इंद्रधनुष- प्रदीप पाठक

ये पंक्तियाँ उन लोगों के लिए हैं जिन्होंने हमेशा अपने माता पिता का तिरस्कार किया है….उन्होंने उनको सिर्फ इसलिए पाला है ताकि वो उनकी सभी चीजों को हथिया लें। चाहे इसमें खुद के भाई का खूं बहे या फिर समाज दुत्कारे। उनको कोई फर्क नहीं पड़ता! …पर जब यही सब अगली पीढ़ी उनके साथ करती है…तब सिर्फ तिल–तिल कर मरना ही ज़रिया रहता है ज़िन्दगी बिताने का…! Read more

प्रदीप पाठक

प्रदीप पाठक
सीनियर मैनेजर- टेक्नोलॉजी, हिंदुस्तान टाइम्स

प्राकृतिक सौंदर्य में डूबा शहर नैनीताल और उसकी आबो हवा से लगा एक और शहर हल्द्वानी से कंप्यूटर साइंस एवं कॉमर्स में ग्रेजुएशन तथा कंप्यूटर साइंस विषय में ही पीजी डिग्री लेने के बाद चार वर्षों तक टीचरी में सर खपाया। किस्मत अजमाने और अपने आप को परखने की निरंतर कोशिश दिल्ली ले आई। “पाइनियर” अख़बार के कंप्यूटर डिपार्टमेंट में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत रहा। अब लगभग पिछले तीन वर्षों से हिंदुस्तान टाइम्स के टेक्नोलॉजी विभाग में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हूं। कॉलेज के जमाने की कुछ चीजें जो आज भी कायम हैं उनमें से एक है चीजों को गहराई से परखना और अगर बात दिल में उतर जाए तो कलम की नोक से टपका देना। आप इसे शायद कविता कहेंगे। किस्सा प्राकृतिक सौंदर्य का हो या कोई व्यंग्य या फिर कोई प्रेम गाथा सब में कहीं न कहीं जूनून छिपा होता है, कोई भाव छिपा होता है, कोई दर्द छिपा होता है। प्रयास को सार्थक बनाने की कोशिश की है मैंने, उन राहगीरों के लिए जो इस ब्लॉग तक आये हैं। शायद दो घूंट सुकून की पिला सकूं उनको।